जब दिल ही टूट गया, तो जीकर क्या करेंगे

यह गाना सालों बाद भी आज तक लोगों की जुबान पर है। आज भी लोग इस गाने उसी चाव से सुनते हैं जैसे पहले सुनते थे। लेकिन इस गाने के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। इस गाने की कंपोजिशन नौशाद ने तैयार की थी। लेकिन गाना केएल सहगल के दिल के करीब था। गाने के पीछे की कहानी को खुद नौशाद ने मुंबई में बताया था। मौका था के एल सहगल पर आधारित एक नाटक के मंचन का। इस नाटक के स्क्रिप्ट राइटर डॉ एम सईद आलम कहते हैं कि दरअसल, बाम्बे में नेहरू सेंटर ने सन 2003 में एम सईद को सहगल पर आधारित नाटक लिखने का जिम्मा सौंपा।

https://en.wikipedia.org/wiki/K._L._Saigal
k l saigal



 जिसपर 2003 दिसंबर में ही नाटक हुआ था। जिसमें टॉम अल्टर ने सूत्रधार की भूमिका निभाई। नाटक पूरे शबाब पर था। काफी बड़ी संख्या में दर्शक आए थे। अचानक टॉम की निगाह भीड़ में एक चेहरा पहचान लेती है। ये कोई और खुद नौशाद थे। टॉम नाटक के बीच में ही नौशाद जी को स्टेज पर आमंत्रित करते है। उनसे केएल सहगल के बारे में कुछ कहने की गुजारिश की जाती है। उसके बाद नौशाद करीब डेढ़ घंटे तक केएल सहगल के बारे में बताते हैं। इसी कड़ी में वो उस सदाबहार गाने के पीछे का इतिहास भी बताते हैं। कहते हैं, जब दिल ही टूट गया गाना दो बार रिकार्ड किया गया था। मैंने सहगल के कहा कि एक बार दारू पीकर रिकार्ड करें और दूसरी बार बिना दारू के। जब गाना रिकार्ड हुआ तो बिना दारू वाला गाना सहगल को भी बहुत पसंद आया था। उन्होंने कहा कि नौशाद जी काश आप पहले मिल जाते। आलम कहते हैं कि यह नाटक नौशाद की वजह से आज भी चर्चित है। लेकिन इसके बाद मैंने सहगल के उपर दिल्ली में भी नाटकों का मंचन किया। 

By open voice

श्रमजीवी पत्रकार। राजनीति, कला-संस्कृति,इतिहास में रूचि।

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