K. L. Saigal’s Journey: From Railway Timekeeper To Bollywood’s First Superstar

दिल्ली….दिलवालों का शहर। जहां जो भी आया, उसे शहर से इश्क हो गया। बालीवुड के पहले सुुपरस्टार केएल सहगल भी यहां आए। वो भी एक दफा नहीं दो बार। दोनों ही बार अलग अलग नौकरियां की। सहगल का जन्म जम्मू में हुआ, बाद में परिवार जालंधर रहने लगा। यहीं रहते हुए अचानक एक दिन केएल सहगल बिना किसी से कुछ बताए घर छोड़ दिए। दिवंगत प्राण नेविल ने अपनी किताब केएल सैगल – द डेफिनिटिव बायोग्राफी में लिखा है कि सहगल परिवार में अपनी मां के अलावा किसी से कुछ नहीं बताते कि वो कहां है, क्या कर रहे हैं। कई कहानियां विभिन्न शहरों में उनके प्रवास और नौकरी से जुड़ी है। जिसमें मुरादाबाद, कानपुर, बरेली, लाहौर, शिमला और दिल्ली शहर शामिल है। सहगल के चचेरे भाई मदन पुरी के हवाले से किताब में लिखा है कि वो नौकरी की तलाश में सन 1928 में दिल्ली आए। यहां वो जालंधर निवासी अपने दो दोस्तों मोहम्मद सलाम और मोहम्मद रज्जाक के साथ रहे। 

https://en.wikipedia.org/wiki/K._L._Saigal

दोनों दोस्त टेलीग्राफ आॅफिस में काम करते थे। जल्द ही सहगल को दिल्ली बिजली विभाग में नौकरी मिल गई। इनके भाई रामलाल जो उस समय शाहदरा रेलवे स्टेशन पर नौकरी करते थे ने बहुत जल्द सहगल को दिल्ली रेलवे स्टेशन पर टाइम कीपर की नौकरी दिलवा दी। लेकिन यहां सहगल का दिल नहीं लगा। करीब एक साल काम किए और अचानक एक दिन बिना किसी को कुछ बताए नौकरी छोड़ दिए। कहा जाता है कि यहां से वो शिमला गए। लेकिन समय का पहिया एक बार फिर घुमा। सहगल एक बार फिर दिल्ली आए। इस बार उन्होंने रैमिंगटन टाइपराइटर कंपनी में सेल्समैन की नौकरी की। यह नौकरी उन्हें इसलिए भी पसंद थी कि इसका स्वभाव घुमंतू था। नौकरी करते हुए उन्होंने टाइप राइटिंग सीखी ताकि ग्राहकों को प्रभावित कर सके।

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