Which song was heard by KL Sehgal a few minutes before death

दिल्ली में सहगल पर आधारित नाटक के दौरान उनकी भतीजी ने साझा की थी यादें

निर्देशक एवं अभिनेता एम सईद आलम कहते हैं कि पाकिस्तान और ओमान समेत भारत के विभिन्न शहरों में केएल सहगल की जिंदगी पर आधारित हम 90 शो कर चुके है। दरअसल, बाम्बे में नेहरू सेंटर ने सन 2003 में एम सईद को सहगल पर आधारित नाटक लिखने का जिम्मा सौंपा। जिसपर इसी साल दिसंबर में नाटक हुआ। टॉम अॉल्टर ने इसमें सूत्रधार की भूमिका निभाई। नाटक नौशाद भी देख रहे थे। ऑल्टर की निगाह पड़ी तो नौशाद को स्टेज पर बुलाया। नौशाद ने बहुत सी कहानियां भी सुनाई। जिसमें यह भी शामिल था कि कैसे सदाबहार गाना जब दिल ही टूट गया को केएल सहगल ने बिना शराब पीए गाया। 



लेकिन नाटक का मंचन सईद को बहुत पसंद नहीं आया। कहते हैं, सहगल का रोल जो अभिनेता निभा रहा था वो गा नहीं रहा था। बैकग्राउंड से सहगल का गीत बज रहा था। चूंकि मैंने स्क्रिप्ट लिखी थी इसलिए कॉपीराइट का अधिकार मेरे पास था। लिहाजा, दिल्ली आने पर मैंने दोबारा नाटक मंचित करने का सोचा। और दिसंबर 2004 में श्रीराम सेंटर में पहली बार नाटक का मंचन हुआ। केएल सहगल की भूमिका को अभिनेता उदय चंद्रा ने जीवंत कर दिया था। वो लाइव गाने गाए। हमने नाटक का अंत कुछ इस तरह किया था कि सहगल अपने आखिरी समय में नौशाद का कंपोज किया गाना सुने थे। यह दृश्य मंचित हुआ तो हॉल में 60-62 साल की महिला ने हाथ उठाया। उन्होंने अपना परिचय दुर्गेश के रूप में बताया और कहा कि अभी नाटक का जो आखिरी सीन आपने दिखाया है, उसमें सहगल की भतीजी मैं ही हूं। वो मंच पर आयी और बताया कि आखिरी दिनों में उनकी तबियत खराब रहती थी। इसलिए परिवार के सदस्यों की कुछ-कुछ घंटे उनके देखभाल की डयूटी लगती थी। मेरी डयूटी रात के 10 से तड़के सुबह चार बजे तक थी। रात में मैं धार्मिक ग्रंथ पढ़ रही थी, उन्होंने कहा कि जब दिल ही टूट गया गाना का रिकार्ड चला दो। और यह गाना सुनते हुए उन्होंने आंखें मूंद ली।

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