Subscribe Now

* You will receive the latest news and updates on your favorite celebrities!

Trending News

By using our website, you agree to the use of our cookies.
महाराष्ट्र के covid-19 के ट्रेंड से पूरेे देश को क्यों चिंतित होना चाहिए?
आजकल

महाराष्ट्र के covid-19 के ट्रेंड से पूरेे देश को क्यों चिंतित होना चाहिए? 


किसी भी शहर को खास क्या बनाता है? वहां के स्मारक, पर्यटन स्थल या इतिहास। जवाब ढूंढने की कोशिश करें तो सुई निवासियों पर अटक जाती है। वो शहर के लोग ही होते हैं जो किसी ईंट गारे,टाट, लकड़ी से बने शहर को शहर का दर्जा दिलाते हैं। आमची मुंबई…यह वो लाइन है जो निवासियों का प्यार शहर के प्रति दर्शाती है। यह प्यार ही तो है जो मुंबई को कभी रूकने नहीं देता, थकने नहीं देता। ना ही 24 घंटे सोने देता है। आमची मुंबई नारे को दिल्ली ने भी कॉपी किया। मेरी दिल्ली मैं ही सवारूं सरीखे संसोधित नारे के साथ। लेकिन बात बहुत हद तक बनी नहीं। लेकिन पहली बार मुंबई को रुका देख दिल दुखता है। पहली बार गलियों में सन्नाटा पसरा है, परिवहन बंद है। लोग घरों की दहलीज के अंदर है और दुआ कर रहे हैं कि जल्द कोरोना के खिलाफ लड़ाई देश जीत जाए। देश में कोरोना संक्रमित मरीजों के आंकड़ों पर नजर डाले तो महाराष्ट्र पहली पायदान पर दिखता है। यहां मृत्युदर भी सर्वाधिक है। लेकिन मेरी चिंता सिर्फ यही नहीं है, यहां अध्ययन के दौरान जो ट्रेंड डॉक्टरों को नजर आया है वो वो सिर्फ महाराष्ट्र के लिए ही नहीं पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। धारावी जैसे स्लम एरिया में संक्रमण के मामले सामने आने के बाद तो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं? कई मीडिया वेबसाइट पर सेना तैनात करने जैसी चर्चाओं पर आधारित खबरें भी पढ़ी जा सकती है। लेकिन क्या वाकई में वर्तमान गठबंधन सरकार कोरोना की रोकथाम में नाकाम हुई? क्या सरकार इसके खतरे को लेकर संजीदा नहीं थी? क्या गठबंधन के बीच की रार की वजह से पुख्ता तरीके से कार्रवाई नहीं हो पायी? ये तमाम सवाल है जो किसी के मन में भी उठने लाजमी है।
महाराष्ट्र में कोविद 19 का पहला मामला 9 मार्च को सामने आया जब पुणे में दुबई से लौटा एक कॅपल पॉजीटिव पाया गया। इसके अगले ही दिन तीन और मामले सामने आए जो इसी कॅपल्स के संपर्क में आए थेे। सभी पांचों को नायडू अस्पताल में भर्ती कराया गया। 11 मार्च को मुंबई में दो लोग संक्रमित हुए जो पुणे के कॅपल्स से मिले थे। 12 मार्च को संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 11 तक पहुंच गया। पुणे में तीन और मामले आए, नागपुर में एक आया ये सभी अमेरिका से आए थे। 24 मार्च को कोरोना ने 100 का आंकड़ा छूआ। इस यूं समझें कि 9 मार्च से 24 मार्च तक आंकड़ा 100 पहुंचा लेकिन इसके बाद दो सौ मामला पहुंचने में सिर्फ पांच दिन लगे। 29 मार्च को 203 केस हो गए। 7 अप्रैल तक 1000 मामले हो गए और 18 अप्रैल तक आंकड़ा 3648 पहुंच गया, राज्य में कोरोना से 211 लोगों की मौत भी हुई। अब महाराष्ट्र में संक्रमण के ट्रेंड देखे तो पता चलता है कि मुंबई सिटी और मुंबई सबअर्बन इलाके में 16 अप्रैल तक 2073 केस आए। 205 रिकवरी हुई और 117 की मौत। पुणे में 473 मामले आए। 41 रिकवरी और 45 मौत हुई। पिंपरी, पूणे देहात, थाणे, कल्याण, नवी मुंबई, भिवांडी, उल्हासनगर में मामले सर्वाधिक आए।


चिंता लाजमी है
महाराष्ट्र में संक्रमण की दर और मृत्यु दर भारत के किसी भी राज्य की तुलना में अधिक है। लाइव मिंट लिखता है कि 13 अप्रैल तक महाराष्ट्र में 160 लोगों की मौत हुई। 2334 केस आए। इसे आंकड़ों की कसौटी पर कसें तो यह दर 6.9 फीसद है। दिल्ली में इस समय तक 28 लोगों की मौत हुई थी, 1510 कंफर्म केस आए थे। मृत्यु दर 1.8 थी। तमिलनाडु में 1173 कंफर्म मामले आए, 11 मौतें हुई। मृत्यु दर 0.93 थी। पोल टाॅक वेबसाइट की मानें तो पुणे और ठाणे में ठीक होने वालों से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। नागपुर में स्थित थोड़ी बेहतर है।
 मुंबई स्टेट हेल्थ कमिश्नर अनूप यादव के हवाले से कोट किया गया है कि यहां प्रसार बहुत ही भिन्न है। मरीज बिल्कुल ठीक दिखता है। लेकिन अस्पताल लाने के एक से तीन घंटे के भीतर ही मामला क्रिटिकल हो जाता है। चूंकि मुंबई में केस ज्यादा है इसलिए मौत भी ज्यादा हुई है। ऐसा देखा गया है कि ऐसे लोग जिनमें शुरूआत में मामूली लक्षण दिखाई देते हैं, वो इसे नजरअंदाज कर दे रहे हैं। लेकिन कुछ ही दिनों में स्थिति क्रिटिकल हालत में पहुंच जा रही है। खासकर ऐसे मरीज जिन्हें डायबीटिज, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां है। 13 अप्रैल को जारी प्रेस विज्ञप्ति में महानगर कारपोरेशन आफ ग्रेटर मुंबई ने कहा है कि 87 फीसद मौत के मामलों में पाया गया कि मृतकों को डायबीटिज, हाइपरटेंशन, दिल की बीमारियां थी। जबकि 7-8 फीसद उच्च जोखिम वाले आयु वर्ग में थे। संक्रमण को रोकने का एकमात्र तरीका है शारीरिक दूरी। लेकिन धारावी जैसे इलाकेे में यह असंभव दिखता है। जहां 7-8 लोग एक छोटे से कमरे में रहते हों, गलियां इतनी संकरी हो कि एक व्यक्ति ही गुजर पाता हो। टॉयलेट शेयर करना पड़े वहां किसी संक्रमित का कांटेक्ट ट्रेस करना बहुत ही मुश्किल काम है। महाराष्ट्र में मामला बढ़ने के पीछे एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा टेस्टिंग हो रही है।


Related posts

Leave a Reply

Required fields are marked *

en_GBEnglish
en_GBEnglish