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covid-19 यह लड़ाई है धीरज और प्रेम की : मृणालिनी
शख्सियत

covid-19 यह लड़ाई है धीरज और प्रेम की : मृणालिनी 

covid 19 पर कथक

कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मौत का आंकड़ा भी बढ़ ही रहा है। इस तरह की हताशा और निराशा भरी खबरों के बीच सोशल मीडिया पर कोरोना को केंद्रित एक कथक नृत्य अपलोड होते ही वायरल हो गया। चर्चा कुछ यूं हुई कि संस्कृति मंत्रालय ने अपने फेसबुक पेज पर वीडियो शेयर किया। साहित्य संग कथक का यह मेल सिर्फ दिल्ली ही नहीं पूरे हिंदुस्तान ने जी भर के देखा। तभी तो इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब पर वीडियो देखने वालों की संख्या हजारों से लाखों में पहुंचती जा रही है। नृत्यांगना मृणालिनी की जमकर तारीफ हो रही है। मृणालिनी द्वारका इलाके में रहते हैं। वीडियो के संदर्भ में उनसे बातचीत हुई।

source – mrinalini instagram



प्रश्न :- आपने कुलदीप मिश्र की कविता को कोरियोग्राफ किया है। आप दोनों एक दूसरे को जानते तक नहीं है? फिर कैसे यह संयोग बना।
उत्तर :- जी, मैं और कुलदीप एक दूसरे को जानते तक नहीं है। दरअसल, हुआ यूं कि एक दिन एक कविता वाट्सएप पर घूमते हुए हमारे घर के एक सदस्य के पास पहुंची। चूंकि लॉकडाउन है तो सभी सदस्य बैठे हुए थे। मेरी मां ने मुझसे कहा कि इस कविता पर कोरियोग्राफी करनी चाहिए। बस फिर क्या था, मैंने कविता सुनी। आधे घंटे के अंदर हम अपने अपार्टमेंट के गलियारे में थे। वहां हमने वीडियो शूट किया। अभ्यास और शूटिंग की प्रक्रिया करीब 40 मिनट तक चली। वीडियो करीब साढ़े चार मिनट का है। जिस समय वीडियो हमनें बनाया, उस समय इसे सोशल मीडियो पर शेयर करने की बात तो सोची भी नहीं गई थी। वो तो बनने के बाद मैंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर बस यूं ही शेयर कर दिया। देखते ही देखते हजारों लोगों के कमेंट आए, लोगों ने वीडियो पसंद किया। इसके बाद यूट्यूब पर अपलोड किया। जब वीडियो वायरल हुआ तो मैंने कवि कुलदीप मिश्रा को ढूंढा। हमनें मिलकर इंस्टाग्राम लाइव भी किया, जिसे पांच हजार लोगों ने देखा।

प्रश्न : ऐसा क्या था कविता में, जिसने आपको कोरियोग्राफी के लिए प्रेरित किया?
उत्तर :- वीडियो वायरल होने का ज्यादा श्रेय कुलदीप मिश्र को जाता है। इसमें कोई संगीत नहीं था। कविता खुद संगीतमय है। हर शब्द इस कदर बंधे हैं कि दिल को छू लेते है। कोविद 19 की वजह से जो परिस्थितियां उपजी है। वो सभी शब्दों के जरिए बड़ी संजीदगी से पिरोयी गई है। मसलन, लोग घरों में है। डरे भी है। लेकिन एक दूसरे का हौसला आफजाई भी कर रहे हैं। डेनमार्क, इटली, स्पेन सरीखे देशों का जिक्र है। और सबसे जरूरी बात कि यह परिस्थितियों का कल्पना इतनी खूबसूरती से किया गया है कि इसे नृत्य के जरिए दर्शकों तक पहुंचाना संभव हो पाया।

प्रश्न : कोरोना से उपजी परिस्थितियों पर आधारित कविता की कोरियोग्राफी कितनी कठिन या आसान थी?
उत्तर : कथक, कथा से ही आता है। तो हमारे डांस फार्म में अभिनय शुरू से ही रहा है। कविता, गजल, भजन पर प्रस्तुति करती आ रही हूं। हां, इस समय परिस्थितियां थोड़ी अलग है। हमें यह ध्यान देना था कि लोगों को यह आशा एवं उम्मीदों भरा दिखे। कथक नृत्यांगना की वजह से कठिन या आसान तो नहीं कह सकती लेकिन हां इसके बोल इतने बेमिसाल है कि यह नृत्य भी शानदार कोरियोग्राफ हुआ। लोगों ने हम दोनों को आगे भी संयुक्त प्रस्तुति में देखने की गुजारिश की है।

प्रश्न : आपको क्या लगता है कि वीडियो क्यों वायरल हुआ?
उत्तर :- इस समय सभी घर की दहलीज के अंदर है। पर्याप्त समय है। कोरोना को लेकर जो खबरें आ रही हैं वो अक्सर नकारात्मक है। मसलन, कोरोना पीड़ितो की संख्या बढ़ी, कोरोना से मौत का आंकड़ा बढ़ा आदि-आदि। इन सब के बीच हमारी वीडियो लोगों के लिए उम्मीद की एक किरण लेकर आयी। शायद यही वजह थी कि लोगों ने काफी पसंद किया।
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वीडियो में क्या है
वीडियो की शुरूआती लाइनें हैं।
ये हिंदुस्तान है
और ये मार्च का महीना है
एक फैसला आपको करना है
ठीक है कि फिजा ठीक नहीं
मालूम है कि माहौल डर का है
बदसूरत सन्नाटे की आहट सुनी हमनें
धुक धुकी है छाती के भीतर
फिक्र है बुजुर्गों, बच्चों की।
इसके बाद लोगों की परेशानियों को शब्दों के जरिए बयां करती कविता कहती है कि शायद देश को किसी की नजर लग गई है। स्पेन, डेनमार्क के माहौल को बयां करती है। लेकिन इसके बाद यह उम्मीद बंधाती है कि एक दिन माहौल बदलेगा।
मेरे एक पड़ोस की बच्ची ने फोन किया है पड़ोसी को
कि कोरोना चला जाएगा तो खेलेंगे
सारी दुनिया सख्ती और नर्मी का प्रयोग कर रही है।
ये लड़ाई बंदूकों और जहाजों की नहीं
धीरज और प्रेम की है
और अंत में कविता के बोल है कि
किसी का हाथ छूना नहीं है
पर किसी का साथ छोड़ना भी नहीं है
कल जब सबकुछ खुलेगा
तो देखना, इसी आसमान में उड़ते पंछी कहेंगे कि
कमबख्त जिद्​दी इंसानों ने
एक और लड़ाई जीत ली।

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