डॉ ल्यूक मॉन्टैग्नियर…जिन्हें 2008 में नोबल पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। डॉ ल्यूक वो ही साइंटिस्ट है जिन्होंने 1983 में एचआईवी वायरस की खोज की थी। खैर अब हम आते हैं COVID 19 पर। जैसा कि अभी इसकी उत्पत्ति को लेकर तमाम तरह के शोध सामने आ रहे हैं। अभी यह माना जा रहा है कि यह प्राकृति रुप से पैंगोलिन, चमगादड़ के जरिए इंसानों में आया लेकिन ल्यूक इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं। कहते हैं COVID 19 मानव निर्मित है।



मेडिसिन के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर ल्यूक दावा करते हैं कि SARS-CoV-2 एक हेरफेर किया हुआ वायरस है जो गलती से वुहान, चीन की एक प्रयोगशाला से जारी किया गया था। कहा जाता है कि चीनी शोधकर्ताओं ने एड्स के टीके को विकसित करने के लिए अपने काम में कोरोना वायरस का उपयोग किया। HIV RNA के टुकड़े SARS-CoV-2 जीनोम में पाए गए हैं।
प्रोफेसर मॉन्टैग्नियर के अनुसार, कोरोना वायरस पर अपने काम के लिए जानी जाने वाली इस प्रयोगशाला ने एड्स के टीके की खोज में एचआईवी के लिए वेक्टर के रूप में इनमें से एक वायरस का उपयोग करने की कोशिश की! बकौल ल्यूक “मेरे सहकर्मी, जैव-गणितज्ञ जीन-क्लाउड पेरेज़ के साथ मैंनेे इस आरएनए वायरस के जीनोम के विवरण का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया है। हमसे पहले भी लोगों ने इसके बारे में पता लगाया है। यहां वो भारतीय रिसर्चरों के बारे में बताते हैं। कहते हैं, भारतीय शोधकर्ताओं ने पहले से ही विश्लेषण के परिणामों को प्रकाशित करने की कोशिश की है। जिसमें पता चला है कि इस कोरोनावायरस जीनोम में एक और वायरस यानी एचआईवी वायरस (एड्स वायरस) के अनुक्रम होते हैं। लेकिन वे अपने निष्कर्षों को वापस लेने के लिए मजबूर हो गए क्योंकि उनपर बहुत दबाव था।
क्या ऐसा मुमकिन हुआ होगा कि कोराना वायरस एक ऐसे मरीज से आया होगा जो एचआईवी संक्रमित हो। ल्यूक कहते हैं नहीं, इस जीनोम में एचआईवी अनुक्रम डालने के लिए, आणविक उपकरणों की आवश्यकता होती है, और यह केवल एक प्रयोगशाला में किया जा सकता है। ल्यूक हालांकि यह भी कहते हैं कि हो सकता है यह एक दुर्घटना हो। इस काम का उद्​देश्य एडस के टीके की खोज थी।

By open voice

श्रमजीवी पत्रकार। राजनीति, कला-संस्कृति,इतिहास में रूचि।

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